कप्तानगंज : थाना क्षेत्र के नरायनपुर (सुअरहा) घाट पर छोटी गंडक नदी से खुलेआम अवैध बालू खनन का कारोबार कुटीर उद्योग का रूप ले चुका है। सुबह से शाम तक ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का तांता लगा रहता है, लेकिन खनन विभाग, पुलिस और प्रशासन की कोई कार्रवाई नहीं हो रही। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी, एसपी और खनन अधिकारियों से तत्काल छापेमारी की मांग की है, क्योंकि नदी का तटबंध, खेत और पर्यावरण को भारी नुकसान हो रहा है।
अवैध खनन का कुटीर उद्योग
नरायनपुर घाट पर बिना वैध पट्टे के बालू का अवैध खनन दिन के उजाले में धड़ल्ले से फल-फूल रहा है। स्थानीय ग्रामीण बताते हैं कि ट्रैक्टर और अन्य भारी वाहन नदी में घुसकर बालू लाद रहे हैं, जिससे नदी की धारा बाधित हो गई है। तटबंधों का कटाव तेज हो गया है और आसपास के खेतों में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। पर्यावरणीय मानकों का घोर उल्लंघन हो रहा है, जलीय जीवों का अस्तित्व संकट में है। सरकारी राजस्व को करोड़ों रुपये का चूना लग रहा है, फिर भी जिम्मेदार विभाग हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह गतिविधि कई दिनों से जारी है और अब छिपाने की कोई कोशिश भी नहीं हो रही।
प्रशासनिक मिलीभगत की आशंका
चौंकाने वाली बात यह है कि दिनदहाड़े चल रहे इस अवैध कारोबार पर खनन विभाग, कप्तानगंज थाना पुलिस और राजस्व विभाग की कोई ठोस कार्रवाई नहीं दिख रही। ग्रामीणों में प्रशासनिक मिलीभगत की प्रबल आशंका है, क्योंकि रातोंरात ऐसी गतिविधि पर रोक लगाने की बजाय यह खुलेआम फैल गई है। नदी के प्राकृतिक प्रवाह में बाधा से पारिस्थितिकी तंत्र बर्बाद हो रहा है, मछलियां और अन्य जलीय जीवन नष्ट हो रहे हैं। यदि समय रहते इस पर अंकुश न लगाया गया तो आने वाले मानसून में भयानक बाढ़ और कटाव की स्थिति बन सकती है। क्षेत्रीय नागरिकों ने उच्च अधिकारियों को शिकायत भेजी है, लेकिन अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।
ग्रामीणों की पुकार और भविष्य का खतरा
क्षेत्रवासी जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक और खनन विभाग से मांग कर रहे हैं कि नरायनपुर घाट पर तत्काल छापेमारी हो, माफियाओं पर कठोर एफआईआर दर्ज हो। नदी को लुटेरों के चंगुल से मुक्त करने और पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करने की जरूरत बताई। ग्रामीण चेतावनी दे रहे हैं कि अगर कार्रवाई नहीं हुई तो वे सामूहिक रूप से आंदोलन करेंगे। छोटी गंडक नदी का यह घाट अब माफियाओं का गढ़ बन चुका है, जिससे पूरे क्षेत्र का भविष्य खतरे में है। अब सभी की नजरें प्रशासन पर टिकी हैं कि कब तक यह लूट जारी रहेगी।
रिपोर्ट: गिरजेश गोविन्द राव, कप्तानगंज
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