लखीसराय जिले के बुधौली बनकर पंचायत अंतर्गत श्रृंगीऋषि आश्रम में नौ दिवसीय मानस श्रृंगीऋषि रामकथा का रविवार को धूमधाम से समापन हुआ। राष्ट्रसंत श्री मोरारी बापू द्वारा अनावृत श्रृंगीऋषि मुनि की अप्रतिम प्रतिमा का विधिवत लोकार्पण बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने किया। आदिवासी बालाओं के मनमोहक नृत्य और गायन ने पूरे परिसर को भावविभोर कर दिया, जबकि हजारों भक्तों की उपस्थिति ने इसे अविस्मरणीय बना दिया।

उपमुख्यमंत्री का भावुक संदेश
उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने मंच से भावुक होकर कहा, “यह मेरी जन्मभूमि है।” उन्होंने श्रृंगीऋषि धाम के समग्र विकास के लिए लगातार प्रयासरत रहने का वचन दोहराया। आधारभूत सुविधाओं के विस्तार और इसे धार्मिक-पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने पर जोर दिया। सूर्यगढ़ा विधायक रामानंद मंडल ने कहा कि श्रृंगीऋषि आश्रम उनके क्षेत्र की ऐतिहासिक थाती है, और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जल्द इसे बिहार का प्रमुख पर्यटन केंद्र घोषित कराएंगे।

सांस्कृतिक उल्लास की रंगीन झलक
महोत्सव में आदिवासी समाज के हजारों सदस्य पारंपरिक वेशभूषा, लोकगीतों और नृत्य-संगीत के साथ शामिल हुए, जिससे पूरा परिसर सांस्कृतिक उमंग से भर उठा। गायक कलाकार पंकज भारती ने अपने भजनों से श्रोताओं को आकर्षित किया, जबकि राजीव रंजन, जागृति कुमारी, निर्भय भारद्वाज की प्रस्तुतियों ने तालियां बटोरीं। सवेरा नाट्य संस्थान के कलाकारों ने पर्यावरण संरक्षण पर नाटक मंचित कर महत्वपूर्ण संदेश दिया, जिसकी सभी ने खूब सराहना की।

प्रमुख अतिथियों के विचार
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए श्रृंगीऋषि धाम मंदिर न्यास समिति के अध्यक्ष और जिला पदाधिकारी मिथिलेश मिश्र ने धाम के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह धरोहर न केवल लखीसराय बल्कि पूरे बिहार की है, जिसके संरक्षण के लिए निरंतर प्रयास जारी हैं। पूर्व विधायक प्रह्लाद यादव, भाजपा जिला अध्यक्ष दीपक कुमार सिंह, राज्य महिला आयोग की सदस्य पिंकी कुशवाहा, नोनगढ़ पंचायत मुखिया जुली यादव और सकलदेव बिंद ने भी आयोजन की भूरि-भूरि प्रशंसा की।

धाम का ऐतिहासिक महत्व
लखीसराय का श्रृंगीऋषि धाम अशोक धाम के रूप में भी प्रसिद्ध है, जो रामकथा और आध्यात्मिक साधना का प्रमुख केंद्र रहा है। इस महोत्सव ने स्थानीय आदिवासी संस्कृति को प्रमुखता से प्रदर्शित किया। जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी मृणाल रंजन, प्रतिमा आर्ट कंसल्टेंट रविराज पटेल, क्यूरेटर अभिषेक कुमार सिंह और वरीय उप समाहर्ता शशि कुमार की उपस्थिति ने कार्यक्रम को और गरिमामय बनाया। यह आयोजन धाम को राष्ट्रीय स्तर पर चिन्हित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।

भविष्य की योजनाएं
उपमुख्यमंत्री ने धाम के चारों ओर आधारभूत विकास की रूपरेखा प्रस्तुत की, जिसमें सड़क, बिजली और आवासीय सुविधाएं शामिल हैं। विधायक रामानंद मंडल ने क्षेत्रीय विकास की जिम्मेदारी लेते हुए पर्यटन को बढ़ावा देने का आश्वासन दिया। यह महोत्सव न केवल धार्मिक एकता का प्रतीक बना, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने का संकल्प भी दिलाया।
रिपोर्ट- कृष्णदेव/लखीसराय
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