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Lord Krishna: भगवान कृष्ण को रणछोर क्यों कहा गया? जानिए

Why was Krishna called Ranchor: भगवान श्रीकृष्ण को भक्त योगेश्वर, द्वारकाधीश, मुरलीधर और रणछोर जैसे अनेक नामों से जानते हैं. लेकिन अक्सर लोगों के मन में यह प्रश्न उठता है कि धर्म की रक्षा करने वाले, महाभारत के महानायक कृष्ण को ‘रणछोर’ क्यों कहा गया? क्या सच में वे युद्ध से भागे थे, या इसके पीछे कोई गहरा धार्मिक और रणनीतिक अर्थ छिपा है?Ara,Bihiya : पुलिस की बड़ी रेड 1 करोड़ की विदेशी शराब जब्त, तस्कर गिरफ्तार

रणछोर नाम की पृष्ठभूमि
‘रणछोर’ शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है, रण यानी युद्ध और छोर यानी छोड़ने वाला. अर्थात जो युद्ध छोड़ दे। लेकिन श्रीकृष्ण के संदर्भ में इसका अर्थ कायरता नहीं, बल्कि धर्म और नीति की रक्षा से जुड़ा है.

जरासंध और मथुरा का संकट
श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार, मथुरा के राजा कंस के वध के बाद मगध नरेश जरासंध ने कंस की मृत्यु का बदला लेने के लिए मथुरा पर 17 बार आक्रमण किया. हर बार श्रीकृष्ण और बलराम ने जरासंध की सेना को पराजित किया, लेकिन बार-बार के युद्ध से मथुरा की जनता संकट में पड़ने लगी.

रण छोड़ने का निर्णय क्यों लिया?
18वीं बार जरासंध के आक्रमण के समय श्रीकृष्ण ने युद्ध न करने का निर्णय लिया और यादवों को लेकर समुद्र के मध्य द्वारका नगरी बसाई, इस रणनीतिक निर्णय का उद्देश्य था निर्दोष जनता की रक्षा, अनावश्यक रक्तपात से बचाव, भविष्य के महायुद्ध (महाभारत) की तैयारी, यहीं से श्रीकृष्ण को ‘रणछोर’ कहा गया.

रणछोर नहीं, बल्कि महान रणनीतिकार
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, श्रीकृष्ण ने युद्ध छोड़ा, लेकिन धर्म नहीं छोड़ा. वे जानते थे कि हर युद्ध लड़ना ही वीरता नहीं होती, बल्कि कब, कहां और क्यों युद्ध करना है, यह तय करना ही सच्ची नीति है.

रणछोर नाम का आध्यात्मिक संदेश
रणछोर नाम हमें यह सिखाता है कि हर परिस्थिति में टकराव जरूरी नहीं, बुद्धि और रणनीति, शक्ति से अधिक प्रभावशाली हो सकती है, धर्म की रक्षा के लिए कभी-कभी पीछे हटना भी विजय का मार्ग बनता है.

द्वारका में रणछोरजी का मंदिर
गुजरात के द्वारका में भगवान कृष्ण को आज भी रणछोरजी के नाम से पूजा जाता है, यहां रणछोर शब्द अपमान नहीं, बल्कि सम्मान और श्रद्धा का प्रतीक है.

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