मथुरा : के शिक्षा विभाग में भूचाल आ गया है। एक निलंबित शिक्षक ने खुलेआम जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) रतन कीर्ति को रिश्वत देने की कोशिश की। इस घटना ने पूरे विभाग में हड़कंप मचा दिया है। ईमानदार अधिकारी ने आरोपी शिक्षक को दफ्तर से बाहर निकलवा कर तुरंत नोटिस थमा दिया और शासन को पूरी रिपोर्ट भेज दी। अब रिश्वतखोर शिक्षकों में खौफ का माहौल है।
विद्यालय निरीक्षण में अनुपस्थिति से निलंबन
यह मामला 24 अप्रैल 2025 का है जब तत्कालीन बेसिक शिक्षा अधिकारी ने प्राथमिक विद्यालय नगला ताज, विकासखंड बलदेव का आकस्मिक निरीक्षण किया। इस दौरान प्रधानाध्यापक सरन सूजान विद्यालय में अनुपस्थित पाए गए। उनकी गैरहाजिरी को गंभीर लापरवाही मानते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
निलंबन के बाद खंड शिक्षा अधिकारी राया को जांच का जिम्मा सौंपा गया। जांच अधिकारी ने सरन सूजान को अपना पक्ष रखने के लिए 7 दिन का नोटिस जारी किया था। लेकिन इसके बावजूद निलंबित शिक्षक ने विभागीय कार्रवाई से बचने के लिए गलत रास्ता चुन लिया।
BSA कार्यालय में रिश्वत का नंगा नाच
5 जनवरी 2026 को दोपहर के समय BSA रतन कीर्ति अपने कार्यालय में विभागीय कार्यों में व्यस्त थीं। तभी निलंबित शिक्षक सरन सूजान अचानक बीएसए कार्यालय में घुस आया। वह सीधे बहाली की मांग करने लगा और दबाव बनाने लगा।
जब बात नहीं बनी तो उसने BSA की कुर्सी के पास जाकर जमीन पर बैठने का ड्रामा शुरू कर दिया। फिर खुलेआम रिश्वत देने की पेशकश कर दी। सरन सूजान ने अपने बचाव और बहाली के लिए पैसे देने का लालच दिया। यह पूरी घटना कार्यालय में मौजूद अन्य कर्मचारियों के सामने हुई।
ईमानदार बीएसए की सख्त कार्रवाई
BSA रतन कीर्ति ने इस रिश्वतकांड को बर्दाश्त नहीं किया। उन्होंने तुरंत बाहर खड़े स्टाफ को बुलाया और निलंबित शिक्षक सरन सूजान को कार्यालय से बाहर निकलवा दिया। इसके बाद विभागीय कार्रवाई के लिए नोटिस थमाकर भेज दिया।
साथ ही पूरे मामले को शासन स्तर पर दर्ज करा दिया गया है। बीएसए ने स्पष्ट कर दिया है कि रिश्वत लेना या देना दोनों स्वीकार्य नहीं। इस घटना ने मथुरा शिक्षा विभाग में कार्यरत सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच संदेश दे दिया है।
शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार के खिलाफ नई लहर
इस घटना के बाद शिक्षा विभाग में सनसनी फैल गई है। रिश्वत के जरिए ट्रांसफर-पोस्टिंग और बहाली कराने वाले शिक्षकों में खौफ का माहौल है। सूत्रों के अनुसार विभाग अनुपस्थित रहने वाले शिक्षकों की लिस्ट तैयार कर रहा है।
ऐसे अधिकारियों के खिलाफ जल्द सख्त कार्रवाई के संकेत मिल रहे हैं। स्थानीय स्तर पर BSA रतन कीर्ति की ईमानदारी की चारों ओर सराहना हो रही है। उनका यह साहसिक कदम अन्य अधिकारियों के लिए उदाहरण बन गया है।
मथुरा शिक्षा विभाग में अब पारदर्शिता और जवाबदेही का नया दौर शुरू होने के आसार हैं। यह घटना न केवल मथुरा बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के शिक्षा विभाग के लिए संदेश है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कोई छूट नहीं मिलेगी।
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