India First Civil Service Exam: भारत में सिविल सेवा परीक्षा (Civil Services Exam) देश की सबसे प्रतिष्ठित और कठिन परीक्षाओं में से एक मानी जाती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसकी शुरुआत कब और कैसे हुई? आइए जानते हैं इतिहास के पन्नों से यह रोचक तथ्य.
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पहली सिविल सेवा परीक्षा की तारीख
भारत में सिविल सेवा परीक्षा की नींव 1853 के चार्टर अधिनियम के तहत रखी गई थी, जिसने खुली प्रतियोगिता की शुरुआत की, और पहली परीक्षा 1855 में लंदन में हुई, जिसमें सत्येंद्रनाथ टैगोर 1863 में उत्तीर्ण होने वाले पहले भारतीय बने, जबकि भारत में यह परीक्षा यह परीक्षा 1922 से भारत (इलाहाबाद और दिल्ली) में आयोजित होने लगी.
परीक्षा का उद्देश्य और महत्व
यह परीक्षा प्रतिष्ठित सरकारी सेवाओं जैसे प्रशासन, कानून और शिक्षा में नियुक्ति के लिए थी, इसका मकसद था ब्रिटिश शासन में प्रशासनिक दक्षता बढ़ाना. भारतीय छात्रों को अवसर देकर, उन्हें साक्षर और प्रशिक्षित प्रशासनिक अधिकारी बनाना.
पहली परीक्षा का पैटर्न
अंग्रेजी भाषा और साहित्य, गणित और तर्कशक्ति, सामान्य ज्ञान और इतिहास, इसमें कुल 12 से 15 विषयों पर आधारित परीक्षा ली गई थी.
पहली परीक्षा के परिणाम
पहली परीक्षा में केवल 10 उम्मीदवारों को चयनित किया गया, लेकिन प्रारंभिक भारतीय अधिकारी इसी समय से प्रशासन में शामिल हुए, इसे ब्रिटिश शासन की पहली कोशिश माना जाता है भारतीय प्रशासनिक प्रणाली में सुधार लाने की.
आधुनिक सिविल सेवा परीक्षा से तुलना
आज IAS, IPS, IFS जैसी प्रतिष्ठित सेवाओं की भर्ती इसी परीक्षा का विकास है. प्रारंभिक परीक्षा और आधुनिक UPSC परीक्षा में विषयों और पैटर्न में अंतर है, लेकिन प्रतिष्ठा और चुनौती का स्तर हमेशा उच्च रहा.
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