Asthma control tips: अस्थमा (दमा) एक श्वसन रोग है, जो सांस की नलियों में सूजन और बार-बार खांसी या सांस फूलने की समस्या पैदा करता है. बढ़ते प्रदूषण और बदलते मौसम की वजह से अस्थमा आजकल आम हो गया है, लेकिन नेचरोपैथी उपचार और कुछ आसान टिप्स अपनाकर इसे कंट्रोल किया जा सकता है.
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Asthma Control: 10 आसान टिप्स
1. नियमित इनहेलर और दवा का इस्तेमाल- डॉक्टर द्वारा दी गई दवाओं और इनहेलर को समय पर लेना बहुत जरूरी है.
2. एलर्जी ट्रिगर्स से बचें- धूल, धुआं, पालतू जानवर या तेज़ खुशबू अस्थमा अटैक को बढ़ा सकते हैं.
3. हल्का व्यायाम और योग- हल्की एक्सरसाइज, प्राणायाम और योग फेफड़ों को मजबूत बनाते हैं.
4. गुनगुना पानी और हर्बल टी- गुनगुना पानी या तुलसी की चाय बलगम हटाने और सांस में राहत देने में मदद करती है.
5. सर्दियों में गर्म कपड़े पहनें- ठंडी हवा सीधे फेफड़ों पर असर डालती है, मफलर और गर्म कपड़े जरूरी हैं.
6. संतुलित और हल्का आहार- बहुत तला-भुना या प्रोसेस्ड फूड अस्थमा को बढ़ा सकता है.
7. नेचरोपैथी उपाय अपनाएं- हर्बल सिरप, आयुर्वेदिक काढ़ा, सांस सुधारने वाले नेचरोपैथिक एक्सरसाइज, इसके बाद नेचरोपैथी उपाय नियमित करने से सांस की तकलीफ और अटैक की संख्या कम होती है.
8. तनाव कम करें– स्ट्रेस और एंग्जाइटी अस्थमा को ट्रिगर कर सकती हैं. ध्यान, मेडिटेशन और गहरी सांस मदद करती है.
9. पर्यावरण को साफ रखें- घर और आस-पास साफ-सफाई रखें. धूल, धुआं और फंगस अस्थमा बढ़ा सकते हैं.
10. समय-समय पर डॉक्टर से फॉलो-अप- लक्षण कम होने पर भी डॉक्टर से सलाह लेते रहें और दवाओं में बदलाव उनकी राय से करें.
नेचरोपैथिक विशेषज्ञों की राय
डॉ. आर.के. शर्मा (नेचरोपैथी विशेषज्ञ) के अनुसार, अस्थमा केवल फेफड़ों की बीमारी नहीं है, यह गलत लाइफस्टाइल, कमजोर इम्यून सिस्टम और एलर्जी का नतीजा है. नेचरोपैथी में शरीर की खुद को ठीक करने की क्षमता को बढ़ाया जाता है.
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