FirstWomanAshokChakra: भारत के सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार अशोक चक्र से सम्मानित होने वाली पहली महिला नीरजा भनोट थीं, उनकी बहादुरी और बलिदान आज भी देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है.
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कौन थीं नीरजा भनोट?
नीरजा भनोट पेशे से पैन एम एयरवेज (Pan Am) की फ्लाइट अटेंडेंट थीं. 5 सितंबर 1986 को पैन एम फ्लाइट 73 कराची (पाकिस्तान) में आतंकियों द्वारा हाईजैक कर ली गई, उस समय नीरजा सिर्फ 22 साल की थीं.
कैसे दिखाई अद्भुत बहादुरी?
हाईजैक के दौरान नीरजा भनोट ने सूझबूझ और साहस का परिचय देते हुए, कॉकपिट क्रू को समय रहते अलर्ट किया, आतंकियों को यात्रियों की पहचान संबंधी जानकारी देने से इनकार किया, बच्चों और कई यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालने में मदद की. इसी दौरान आतंकियों की गोलियों का निशाना बनकर नीरजा शहीद हो गईं, लेकिन उनकी वजह से 300 से अधिक यात्रियों की जान बच सकी.
अशोक चक्र से सम्मान
नीरजा भनोट की असाधारण वीरता और बलिदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें 1987 में मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया, इसके साथ ही वे अशोक चक्र पाने वाली भारत की पहली महिला बनीं.

अन्य सम्मान
नीरजा भनोट को भारत के अलावा अमेरिका और पाकिस्तान की सरकारों ने भी सम्मानित किया, उनका जीवन साहस, कर्तव्य और मानवता की मिसाल माना जाता है.
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