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AccordingToVastu: बालकनी में मंदिर रखने से क्या होता है?

Vastu For Temple In Balcony: आजकल छोटे फ्लैट्स और अपार्टमेंट्स में जगह की कमी के कारण लोग बालकनी में पूजा मंदिर रखना चाहते हैं, लेकिन सवाल उठता है क्या वास्तु शास्त्र इसकी अनुमति देता है और अगर बालकनी में मंदिर रखा जाए तो इसका घर की सुख-शांति और ऊर्जा पर क्या असर पड़ता है, आइए जानते हैं.

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वास्तु शास्त्र क्या कहता है?
वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, पूजा स्थल घर का सबसे पवित्र और शांत स्थान होना चाहिए. मंदिर ऐसी जगह होना चाहिए जहां, शोर कम हो, साफ-सफाई बनी रहे, नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश न हो, बालकनी खुली जगह होती है, जहां धूप, हवा, धूल और बाहरी शोर अधिक होता है. इसी कारण वास्तु में बालकनी को पूजा स्थल के लिए आदर्श स्थान नहीं माना जाता.

बालकनी में मंदिर रखने के नुकसान
वास्तु के अनुसार, बालकनी में मंदिर रखने से पूजा की पवित्रता भंग हो सकती है. ध्यान और एकाग्रता में बाधा आती है, बाहरी नकारात्मक ऊर्जा मंदिर तक पहुंच सकती है, घर में मानसिक अशांति और तनाव बढ़ सकता है. विशेषज्ञ मानते हैं कि खुले स्थान पर भगवान की मूर्ति रखना ऊर्जा असंतुलन पैदा कर सकता है.

किन परिस्थितियों में बालकनी में मंदिर रखा जा सकता है?
अगर घर में कोई अन्य स्थान उपलब्ध न हो, तो कुछ वास्तु नियमों का पालन जरूरी है. बालकनी उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) में हो
मंदिर जमीन पर न रखें, बल्कि ऊंचाई पर रखें, बालकनी साफ और ढकी हुई हो, पूजा के समय शोर और गंदगी से बचाव हो
मंदिर के ठीक ऊपर या नीचे टॉयलेट न हो, इन नियमों का पालन करने से नकारात्मक प्रभाव काफी हद तक कम हो सकता है.

मंदिर रखने की सबसे शुभ दिशा
वास्तु शास्त्र के अनुसार उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) सबसे उत्तम, इसके बाद पूर्व दिशा, दक्षिण दिशा में मंदिर रखने से बचना चाहिए.

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