कुशीनगर: नेबुआ नौरंगिया क्षेत्र के ढोलहा के टोला गुलहरिया गांव में एक दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके को दहला दिया है. पांच दिन पहले शुरू हुई बीमारी ने एक ही पट्टीदारी के तीन मासूम बच्चों की जान ले ली, गुरुवार देर रात और शुक्रवार भोर में हुई इन मौतों से पूरे गांव में मातम पसरा है. परिवार ही नहीं, पूरा गांव दहशत और सदमे में है. परिजनों के मुताबिक, करीब पांच दिन पहले बच्चों को हल्का बुखार हुआ था.
शुरुआती इलाज के लिए उन्हें सीएचसी नेबुआ नौरंगिया ले जाया गया, जहां से हालत गंभीर देखते हुए जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। दो बच्चों की हालत और बिगड़ने पर उन्हें बीआरडी मेडिकल कॉलेज भेजा गया. गुरुवार रात करीब 11:30 बजे मंजू (7) और खुशी (3) की मौत हो गई, जबकि शुक्रवार की भोर में कृष (5) ने भी दम तोड़ दिया. तीनों मासूमों का अंतिम संस्कार गांव के उत्तर दिशा में स्थित दिया में किया गया. मृतकों में मंजू और खुशी रविंद्र की पुत्रियां थीं, जबकि कृष दशरथ गोंड का बेटा था. मंजू और कृष ने मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान दम तोड़ा, वहीं खुशी की मौत सीएचसी में हुई.
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सूचना मिलते ही सीएचसी की मेडिकल टीम गांव पहुंची और दवा छिड़काव कराया। टीम ने प्रभावित परिवारों सहित आसपास के घरों में स्वास्थ्य परीक्षण और दवा वितरण भी किया, जांच में पाया गया कि दोनों परिवारों के पास निजी हैंडपंप तो हैं, लेकिन दो घरों में जल निगम की सरकारी टोंटी उपलब्ध नहीं है. इधर ग्रामीणों ने स्वास्थ्य और सफाई व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं, उनका कहना है कि गांव में महीनों से न तो सफाईकर्मी आते हैं और न ही आशा कार्यकत्री समय पर पहुंचती है. नियमित दवा छिड़काव और सफाई न होने से बीमारी फैलने का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है. गांव में उप-स्वास्थ्य केंद्र न होने के कारण लोगों को तीन किलोमीटर दूर कोटवा कला स्थित सीएचसी पर निर्भर रहना पड़ता है, समय पर एंबुलेंस न मिलने की शिकायत भी ग्रामीणों ने की है.
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय-समय पर स्वास्थ्य जांच, दवा वितरण और सफाई व्यवस्था सुचारु होती, तो कई बीमारियों का समय रहते पता चल सकता था और ऐसी बड़ी घटना को रोका जा सकता था, तीन मासूमों की मौत ने पूरे गांव को झकझोर दिया है और सभी स्वास्थ्य विभाग से तत्काल और ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.
रिपोर्ट- आनन्द सिंह/खड्डा
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